सेंट्रीफ्यूगल पंप में बेयरिंग का कार्य और लुब्रिकेशन
अपनी संरचना के कारण सेंट्रीफ्यूगल पंप संचालन के दौरान रेडियल और एक्सियल भार के अधीन रहते हैं। ये भार पंप के पार्ट्स पर लगातार तनाव पैदा करते हैं और मटीरियल को क्षति पहुँचाते हैं। ऐसे में पंप में उत्पन्न इन भारों को संतुलित करने और रोटेटिंग उपकरणों को सहारा देने, दोनों के लिए बेयरिंग का उपयोग किया जाता है। इसलिए बेयरिंग पंप के सबसे महत्वपूर्ण पार्ट्स में से एक हैं, और गलत बेयरिंग रखरखाव या गलत लुब्रिकेशन पंप का जीवनकाल कम कर देता है।
बेयरिंग का उपयोग करने वाले सभी रोटेटिंग उपकरणों में अंततः घर्षण हावी होगा, बेयरिंग क्षतिग्रस्त होगी और उसे बदलना पड़ेगा। लेकिन सही रखरखाव और सही लुब्रिकेंट से घर्षण को न्यूनतम करके बेयरिंग और पंप, दोनों का जीवनकाल बढ़ाना संभव है।

बेयरिंग की जाँच और लुब्रिकेशन में ध्यान देने योग्य बातें
- सबसे पहले हमें यह जानना आवश्यक है कि आपके पंप की बेयरिंग में किस प्रकार का लुब्रिकेशन है। पंप में उपयोग होने वाली बेयरिंग आमतौर पर ग्रीस-लुब्रिकेटेड सील्ड प्रकार (सिंगल-यूज़), ग्रीस-लुब्रिकेटेड ओपन प्रकार (री-ग्रीसेबल) या बाहरी ऑयल लुब्रिकेशन वाली होती हैं।
- यदि बेयरिंग में बाहरी ऑयल लुब्रिकेशन है, तो non-detergent (ऐसा ऑयल जो अपने भीतर के कणों को मटीरियल की स्थिर सतहों पर जमा कर देता है और घर्षण व संपर्क वाले बिंदुओं तक तलछट और कण नहीं ले जाता) और non-foaming (झाग न बनाने वाले) प्रकार के ऑयल का उपयोग करना चाहिए।
- पंप निर्माता द्वारा प्रकाशित, पंप में उपयोग किए जा सकने वाले ऑयल के प्रकारों को अवश्य देखना चाहिए, और यदि पंप का वातावरण और ऑपरेटिंग परिस्थितियाँ मानकों से बहुत अलग हों, तो इस विषय में निर्माता से अवश्य सहायता लेनी चाहिए।
- अत्यधिक लुब्रिकेशन से हर हाल में बचना चाहिए। अत्यधिक लुब्रिकेशन पंप द्वारा ली जाने वाली पावर बढ़ाकर अनावश्यक ऊर्जा खपत का कारण बनेगा और बेयरिंग में अतिरिक्त गर्मी पैदा करेगा।
- जाँच करने पर यदि ऑयल में अत्यधिक धुंधलापन या तलछट दिखाई दे, तो ऑयल को जल्द से जल्द बदल देना चाहिए।
- यदि बेयरिंग री-ग्रीसेबल प्रकार की है, तो बेयरिंग में एक ही प्रकार और ब्रांड का ग्रीस उपयोग करना चाहिए; अलग-अलग ब्रांड और प्रकार के ग्रीस को आपस में नहीं मिलाना चाहिए।
- इसी प्रकार ग्रीस-लुब्रिकेटेड बेयरिंग में अत्यधिक ग्रीस का उपयोग तापमान और बिजली खपत में वृद्धि करेगा और बेयरिंग में ओवरहीटिंग से होने वाली क्षति का कारण बनेगा।
- चाहे बाहरी ऑयल लुब्रिकेशन हो या ग्रीस लुब्रिकेशन, लुब्रिकेंट बदलते समय पिछले लुब्रिकेंट से बची तलछट और गंदगी को अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए और इस सफ़ाई के बाद ही नया लुब्रिकेंट डालना चाहिए।
- यदि पंप में सील्ड प्रकार की बेयरिंग का उपयोग हो रहा है, तो बेयरिंग बदलने के पहले संकेत मिलते ही उसे नई बेयरिंग से बदल देना चाहिए; पुरानी बेयरिंग के कवर खोलकर उसमें दोबारा ग्रीस भरकर फिर से उपयोग नहीं करना चाहिए।

